मीठी मीठी तकरार [ February 23rd, 2010 ] Posted in » Uncategorized, कविताएँ, फीचर्ड

friendsपता है तुम्है
जब तुम चुपके से
मुझे देख कर
मुस्कुराती हो

तुम्हारी आँखों मै भी
मुझे अपनी तस्वीर
मुस्कुराती नजर आती है

फिर कभी
ऐसा भी होता है
तुम्हारी आँखें
जो कहती हैं
तुम्हरे होंठ उसे
झुठला देते हैं

और तुम्हारा मन
मजे ले ले कर
देखता रहता है
सच्चे झूठ की
झूठे सच की
मीठी मीठी तकरार

फूल

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फूल,

रंग और खुशबू ही नही

आशापुर्ण भी तो होते हैं!

किसी फूल को देख कर

कब उदास हुए थे तुम?

किसी फूल ने कब छीनी

तुम्हरे चहरे से मुस्कान?

कब किसी फूल से छिले

तुम्हारे हाथ?

मेरे दोस्त फूल मात्र

प्रणय निवेदन के लिये ही

नही होते,

जीना सिखलाते है

काँटों मे रहकर

खिलना सिखलाते हैं

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