मीठी मीठी तकरार [ February 23rd, 2010 ] Posted in » Uncategorized, कविताएँ, फीचर्ड
पता है तुम्है
जब तुम चुपके से
मुझे देख कर
मुस्कुराती हो
तुम्हारी आँखों मै भी
मुझे अपनी तस्वीर
मुस्कुराती नजर आती है
फिर कभी
ऐसा भी होता है
तुम्हारी आँखें
जो कहती हैं
तुम्हरे होंठ उसे
झुठला देते हैं
और तुम्हारा मन
मजे ले ले कर
देखता रहता है
सच्चे झूठ की
झूठे सच की
मीठी मीठी तकरार
